मकर संक्रांति  क्या है और उसका वैज्ञानिक महत्व क्या है फुल गाइड इन हिंदी

मकर संक्रांति  क्या है और उसका वैज्ञानिक महत्व क्या है फुल गाइड इन हिंदी

उतरायण ( मकर संक्रांति ) क्या है और उसका  वैज्ञानिक महत्व क्या है फुल गाइड इन हिंदी

मकर संक्रांति ( उतरायण ) हिन्दुओं का प्रमुख एवं धार्मिक त्योंहार है | पौष महीने में सूर्य मकर  राशी में प्रवेश करता है | इसलिए इस त्योंहार को मनाया जाता है | मकर संक्रांति को उतरायण भी कहा जाता है | इसे जनवरी महीने की चौदहवी तारीख को मनाया जाता है | इस  दिन सूर्य धनु राशी को छोड़कर मकर राशी में प्रवेश करता है |

मकर संक्रांति

वैसे देखने जाएँ तो मकर संक्रांति और उतरायण दोनों अलग अलग  है | फिर लोग उसे  एक ही मानते हैं | जबकि उतरायण दिसम्बर महीने की 21 या 22 तारीख को आता है | मकर संक्रांति को भारत में भिन्न नामों से जाना जाता है| जैसे की गुजरात में उतरायण , तमिलनाडू  में पोंगल ,  कर्णाटक और केरल में इसे संक्रांति कहा जाता है |

उतरायण ( मकर संक्रांति ) भारत में किन किन नामों से जानी  जाती है |

मकर संक्रांति :-

राजस्थान ,मध्य प्रदेश , छतीस गढ़ , महाराष्ट्र , सिक्किम , मणिपुर, उत्तर प्रदेश , बिहार , झारखण्ड , आंध्र प्रदेश , उड़ीसा etc राज्यों में मकर संक्राति के नाम से जानी  जाती है

पोंगल :-

तमिलनाडु में इसे पोंगल  नाम से जानी  जाती है |

उतरायण :-

गुजरात और उत्तराखंड  में उतरायण के नाम से जानी जाती है |

पौष संक्रांति :-

पश्चिम बंगाल में इसे पौष संक्रांति कहा जाता है |

खिचड़ी :- उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में इसे खिचड़ी भी कहते हैं |

मकर संक्रमण :- कर्णाटक  में इसे मकर संक्रमण के नाम से जाना जाता है |

इसके आलावा पंजाब , हरयाणा , हिमाचल प्रदेश में माघी , एवं असम में इसे भोगली बिहु  के नाम से जाना जाता है | इसके आलावा मकर संक्रांति  को भारत के आलावा   बहुत से देशों में भी मनाया जाता हैं | जैसे की  श्रीलंका , म्यांमार ,नेपाल , बांग्लादेश ,थाईलैंड , लाओस इत्यादी|

उतरायण ( मकर संक्रांति ) का क्या महत्व है |

उतरायण बहुत ही शुभ दिन माना जाता है | देवताओं के लिए यह सकारात्मक का प्रतिक माना जाता है | इस दिन पूजा, जप, तप ,दान , स्नान करना बहुत ही महत्व रखता है| ऐसा माना जाता है की इस  दिन दिये  हुये  दान से  हमें कई गुना सम्पति प्राप्त होती है | इस  दिन शुद्ध घी और कम्बल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है | भौगोलिक द्रष्टि से भारत उत्तर गोलार्ध में स्थित है | लेकिन मकर संक्रांति के आने से सूर्य की दिशा मकर रेखा की और होती है | जिससे कारन  यह भारत से काफी दूर चला जाता है | और इसी वजह से मकर संक्रांति के बाद दिन बड़े  और रातें छोटी होनी लगती है | इससे से पहले दिन छोटे और रातें बड़ी होने लगती हैं |

उत्तरायण

मकर संक्रांति का एतिहासिक महत्व क्या है | 

महाभारत के सबसे महान सम्राट  भीष्म पिता ने  इसी दिन ही अपनी मृत्यु को अपनाया था | अर्थार्थ  इसी  दिन ही उन्होंने अपना देह त्याग दिया था | इसी दिन ही गंजा जी भागीरथ के साथ चलकर समुन्द्र में मिली थी |  इसी दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शानी देव से मिलने उसके घर गए थे | क्यों की शनि देव ही मकर राशी के स्वामी मने जाते है | इसलिए उत्तरायण को मकर संक्रांति कहते हैं |

मकर संक्रांति का त्योंहार कैसे मनाया जाता है |

वैसे तो मकर संक्रांति  दान करने वह पुण्य कमाने का अवसर है | इस दिन भारत वर्ष  में इसे बड़े ही उत्साह के साथ पतंग उड़ा  कर मनाया जाता  हैं | भारत के कई हिस्सों में इसे में इसे बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है | इस दिन लोग मिठाई , तिल के लड्डू , फल , और गन्ना खा कर बड़े ही धूम धाम से इस त्योंहार को मनाया जाता है |

लास्ट वर्ड 

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